नीतीश के सुर में आई नाराजगी, क्या BJP से JDU का होगा ‘तलाक’?

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भारतीय जनता पार्टी के साथ असहजता बढ़ती जा रही है. ऐसी खबरें आ रही हैं कि कई घटनाओं और पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा नीतीश के बार-बार कथि‍त अपमान की वजह से जेडी (यू)- भाजपा गठबंधन के रिश्तों में फिर से दरार आनी शुरू हो गई है.

पिछले दो हफ्तों में कम से कम चार बार नीतीश कुमार ने बीजेपी के बड़े भाई जैसे कथि‍त रवैए पर नाखुशी जाहिर की है. गत 17 मई को नीतीश कुमार ने आल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जो मोदी सरकार के सिटीजनशिप बिल के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. यह बिल बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से काफी संवदेनशील मसला है.

इस बिल में कहा गया है कि पड़ोसी देशों के हिंदुओं को अगर धर्म के आधार पर परेशान किया जाता है तो उन्हें भारत में नागरिकता दी जाए. नीतीश कुमार ने आसू के प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिया कि वह पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस बिल को रोकने की मांग करेंगे. इसका मतलब यह है कि मोदी सरकार यदि संसद में यह बिल लाती है तो जेडी (यू) इसका विरोध कर सकती है.

नीतीश कुमार ने सबसे पहले मोदी के नोटबंदी का समर्थन किया था. उस समय भी महागठबंधन पर इस बात का मुद्दा बना था. अब उसी को बेंकों के उपर थोपकर खुद को बचाते हुए बीजेपी को दोषी बता रहे है. 29 मई को नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कहा कि बिहार और अन्य पिछड़े राज्यों को विशेष दर्जा देने की मांग पर वित्त आयोग को पुनर्विचार करना चाहिए. यह नीतीश कुमार की काफी पुरानी मांग है. लेकिन बीजेपी के साथ उनके सरकार बनाने के बाद से ही यह ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था. अब उन्होंने इस दबे मसले को फिर से बाहर निकाला है.

यह मसला उन्होंने ऐसे समय में बाहर निकाला है, जब विपक्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए मोदी विरोधी मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहा है. इधर राजद नेता तेजस्वी ने भी नीतीश कुमार को लेकर एक बड़ी बात कह दी है. बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, ”इनके पास कुछ नहीं है. ये आकर क्या करेंगे और यहां कोई जगह नहीं है.

ये इसलिए आएंगे कि हमारे वोट पर जीतें और जो सीटें मिलेंगी उसको जाकर बीजेपी को दे दें फिर से. यहां कोई जगह नहीं है. लालू जी ने पहले ही कहा है कि नीतीश कुमार दोबारा अगर द्वार पर आएंगे तो उनके लिए कोई जगह नहीं होगी.”